❓ Question
🏛️ hanefiप्रश्न: फ़ajर (सुबह) की नमाज़ में कौन सी दुआएँ पढ़ी जाती हैं?
📗 Ruling
वा अलैकुम अस्सलाम व रहमतुल्लाह,
मेरे प्यारे भाई, अल्लाह आपकी इबादतों को कबूल फरमाए। फज्र की नमाज़ एक मुबारक़ इबादत है जो मोमिन को उसकी सुन्नत और फर्ज़ दोनों के साथ अपने दिन की शुरुआत सुकून से करने का अवसर देती है।
हनाफी मज़हब के फिक़्ह के ग्रंथों (मिसाल के तौर पर मरग़िनानी की 'अल-हिदाया' और इब्न आबिदीन की 'रद्दुल-मुह्तार') के अनुसार, फज्र की नमाज़ में पढ़ी जाने वाली दुआएँ और उनका क्रम इस प्रकार है:
1. नमाज़ शुरू करते समय:
इफ़्तितह की तकबीर कहने के बाद खामोशी से 'सुब्हानक' दुआ पढ़ी जाती है। (हनाफी मज़हब में सुब्हानक पढ़ना सुन्नत है।) इसके बाद अऊज़ू और बिस्मिल्लाह पढ़कर सूरह फातिहा और ज़म्मुस-सूरह (कुरआन से कुछ आयतें या छोटी सूरह) पढ़ी जाती है।
2. रुकुअ और सजदों में:
रुकूअ में कम से कम तीन बार "सुब्हाना रब्बियल्-अज़ीम" और सजदों में कम से कम तीन बार "सुब्हाना रब्बियल्-अअला" कहा जाता है।
3. रुकुअ से उठते समय (क़व्मा):
इमाम और अकेले नमाज़ पढ़ने वाला व्यक्ति रुकुअ से उठते समय "समिअल्लाहु लिमन हमिदह" कहता है, और जब पूरी तरह सीधा खड़ा हो जाता है तो "रब्बना लकल-हमद" कहता है।
4. कुनूत की दुआओं का मसला (मज़ाहिब के दरमियान इख़्तिलाफ):
हनाफी मज़हब के नज़दीक, फर्ज़ नमाज़ों में (वित्र के अलावा) लगातार कुनूत की दुआ नहीं पढ़ी जाती। सिवाय इसके कि मुसलमानों पर कोई आम आफत (नाज़िला) आ जाए, तो इमाम रुकुअ के बाद कुनूत पढ़ सकता है।
जबकि शाफ़ीई मज़हब में फज्र की नमाज़ के फर्ज़ की दूसरी रकअत में रुकुअ से उठने के बाद कुनूत की दुआ पढ़ना सुन्नत है। हनाफी मज़हब में फज्र की नमाज़ में हर दिन पाबंदी के साथ कुनूत पढ़ना मकरूह माना गया है।
5. नमाज़ के आखिर में (अत-तहिय्यात):
हर दो रकअतों के बाद और आखिरी बैठक में 'अत-तहिय्यात' पढ़ी जाती है। आखिरी बैठक में इसके अलावा 'सल्ली-बारीक' दुआएँ और 'रब्बना आतिना' व 'रब्बनाग़्फिरली' दुआएँ पढ़कर सलाम फेरा जाता है।
नमाज़ के बाद नबी करीम (स.अ.व.) की सुन्नत पर अमल करते हुए तस्बीह पढ़ी जाती है; 33 बार सुभानल्लाह, 33 बार अल्हम्दुलिल्लाह, 33 बार अल्लाहु अकबर कहा जाता है और दुआ के साथ इसे पूरा किया जाता है।
मैं दुआ करता हूँ कि आपका दिन बरकत और फैज़ से भरा हो। अपनी दुआओं में हमें भी याद रखिएगा।